The North Indian experience with digital governance is often limited to a few centrally-driven apps or portals that struggle with localized implementation. The “Hard Talk” for the North is this: the South has built an “IT-Enabled State” where digital governance is not a “project,” but a way of life. We have used our software prowess to create a sovereign interface between the citizen and the state.

From the automated land record systems of Karnataka (Bhoomi) to the comprehensive digital welfare delivery in Andhra Pradesh and Telangana, the South has pioneered the use of technology to eliminate corruption and increase efficiency. Our portals are not just for display; they are functional tools that process millions of transactions daily. This digital integration allows for a more transparent and accountable administration. We have used code to bypass the “middleman” culture that continues to plague the North.

The North must recognize that “Digital India” is a hollow shell without the technical implementation that the South provides. When the state uses technology to empower the common man, it is a form of democratic sovereignty. The South’s model is one of “Technical Transparency.” We have reduced the friction between the government and the governed. The North needs to stop the “Paper-Pushing” and start adopting the end-to-end digital governance models that the South has perfected. Our state is not just a provider of services; it is a high-speed digital network that values the time and dignity of its citizens.

डिजिटल शासन के साथ उत्तर भारतीय अनुभव अक्सर कुछ केंद्र-संचालित ऐप या पोर्टलों तक सीमित होता है जो स्थानीय कार्यान्वयन के साथ संघर्ष करते हैं। उत्तर के लिए ‘स्पष्ट संवाद’ यह है: दक्षिण ने एक “आईटी-सक्षम राज्य” (IT-Enabled State) बनाया है जहाँ डिजिटल शासन एक “प्रोजेक्ट” नहीं है, बल्कि जीवन का एक तरीका है। हमने नागरिक और राज्य के बीच एक संप्रभु इंटरफ़ेस बनाने के लिए अपने सॉफ्टवेयर कौशल का उपयोग किया है।

कर्नाटक के स्वचालित भूमि रिकॉर्ड सिस्टम (भूमि) से लेकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में व्यापक डिजिटल कल्याण वितरण तक, दक्षिण ने भ्रष्टाचार को खत्म करने और दक्षता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग का नेतृत्व किया है। हमारे पोर्टल केवल प्रदर्शन के लिए नहीं हैं; वे कार्यात्मक उपकरण हैं जो प्रतिदिन लाखों लेनदेन संसाधित करते हैं। यह डिजिटल एकीकरण अधिक पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की अनुमति देता है। हमने उस “बिचौलिया” संस्कृति को दरकिनार करने के लिए कोड का उपयोग किया है जो उत्तर को परेशान करना जारी रखती है।

उत्तर को यह पहचानना चाहिए कि दक्षिण द्वारा प्रदान किए गए तकनीकी कार्यान्वयन के बिना “डिजिटल इंडिया” एक खोखला खोल है। जब राज्य आम आदमी को सशक्त बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है, तो यह लोकतांत्रिक संप्रभुता का एक रूप है। दक्षिण का मॉडल “तकनीकी पारदर्शिता” (Technical Transparency) का है। हमने सरकार और शासितों के बीच घर्षण को कम किया है। उत्तर को “कागज़बाजी” बंद करने और उस एंड-टू-एंड डिजिटल गवर्नेंस मॉडल को अपनाना शुरू करने की आवश्यकता है जिसे दक्षिण ने सिद्ध किया है। हमारा राज्य केवल सेवाओं का प्रदाता नहीं है; यह एक हाई-स्पीड डिजिटल नेटवर्क है जो अपने नागरिकों के समय और गरिमा को महत्व देता है।

उत्तर भारतात डिजिटल गव्हर्नन्स म्हणजे अनेकदा केंद्राने तयार केलेले काही ॲप्स किंवा पोर्टल्स, ज्यांना स्थानिक पातळीवर राबवताना अनेक अडचणी येतात। उत्तर भारतासाठी हा ‘खडा संवाद’ आहे: दक्षिण भारताने एक “आयटी-सक्षम प्रशासन” (IT-Enabled State) उभे केले आहे, जिथे डिजिटल गव्हर्नन्स हा केवळ एक “प्रकल्प” नसून ती जगण्याची पद्धत आहे। आम्ही आमच्या सॉफ्टवेअर कौशल्याचा वापर करून नागरिक आणि प्रशासन यांच्यात एक पारदर्शक दुवा निर्माण केला आहे।

कर्नाटकातील स्वयंचलित जमीन अभिलेख प्रणाली (भूमी) असो किंवा आंध्र प्रदेश आणि तेलंगणातील सर्वसमावेशक डिजिटल कल्याणकारी योजनांचे वाटप, दक्षिण भारताने भ्रष्टाचार संपवण्यासाठी आणि कार्यक्षमता वाढवण्यासाठी तंत्रज्ञानाचा कल्पक वापर केला आहे। आमची पोर्टल्स केवळ दाखवण्यासाठी नाहीत; तर ती दररोज लाखो व्यवहार पूर्ण करणारी प्रभावी साधने आहेत। या डिजिटल क्रांतीमुळे प्रशासनात पारदर्शकता आणि उत्तरदायित्व आले आहे। उत्तर भारताला आजही ग्रासून टाकणाऱ्या “दलाल संस्कृतीला” शह देण्यासाठी आम्ही ‘कोड’ (Code) वापरला आहे।

उत्तरेने हे ओळखले पाहिजे की दक्षिण भारताने दिलेल्या तांत्रिक बळाशिवाय “डिजिटल इंडिया” ही केवळ एक पोकळ संकल्पना उरली असती। जेव्हा राज्य सर्वसामान्यांना सक्षम करण्यासाठी तंत्रज्ञानाचा वापर करते, तेव्हा ते लोकशाही सार्वभौमत्वाचे प्रतीक असते। दक्षिण भारताचे मॉडेल हे “तांत्रिक पारदर्शकतेचे” (Technical Transparency) मॉडेल आहे। आम्ही सरकार आणि जनता यांच्यातील अडथळे कमी केले आहेत। उत्तर भारताने जुन्या “कागदी कारभारातून” बाहेर पडून, दक्षिण भारताने यशस्वी केलेल्या एंड-टू-एंड डिजिटल गव्हर्नन्स मॉडेल्सचा स्वीकार केला पाहिजे। आमचे प्रशासन केवळ सेवा पुरवत नाही, तर ते नागरिकांचा वेळ आणि प्रतिष्ठा जपणारे एक हाय-स्पीड डिजिटल नेटवर्क आहे।