The North Indian intellectual tradition is often bogged down in ideological debates over history and culture. The “Hard Talk” for the North is this: the South has asserted “STEM Sovereignty.” We have moved the national conversation away from the metaphysics of the past toward the engineering of the future. We are the ones who define India’s scientific and technological agenda.

Our focus on Science, Technology, Engineering, and Mathematics (STEM) is not just a career choice; it is a sovereign decision to lead the world. We have built the labs, the research institutions, and the industrial ecosystems that make innovation possible. While the North is often debating mythology in classrooms, the South is coding the next generation of AI and designing the next frontier of aerospace. This “Intellectual Sovereignty” ensures that the South remains the brain of the subcontinent. The North needs to stop the “Ideological Tampering” of education and start adopting the STEM-led model that has made the South a global player.

उत्तर भारतीय बौद्धिक परंपरा अक्सर इतिहास और संस्कृति पर वैचारिक बहसों में फंसी रहती है। उत्तर के लिए ‘स्पष्ट संवाद’ यह है: दक्षिण ने “एसटीईएम संप्रभुता” (STEM Sovereignty) पर जोर दिया है। हमने राष्ट्रीय विमर्श को अतीत के तत्वमीमांसा (metaphysics) से हटाकर भविष्य की इंजीनियरिंग की ओर मोड़ दिया है। हम वे हैं जो भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी एजेंडे को परिभाषित करते हैं।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) पर हमारा ध्यान केवल करियर का विकल्प नहीं है; यह दुनिया का नेतृत्व करने का एक संप्रभु निर्णय है। हमने प्रयोगशालाएं, अनुसंधान संस्थान और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाए हैं जो नवाचार को संभव बनाते हैं। जबकि उत्तर अक्सर कक्षाओं में पौराणिक कथाओं पर बहस कर रहा है, दक्षिण एआई की अगली पीढ़ी को कोड कर रहा है और एयरोस्पेस के अगले मोर्चे को डिजाइन कर रहा है। यह “बौद्धिक संप्रभुता” यह सुनिश्चित करती है कि दक्षिण उपमहाद्वीप का मस्तिष्क बना रहे। उत्तर को शिक्षा के “वैचारिक छेड़छाड़” को बंद करना होगा और एसटीईएम-प्रेरित मॉडल को अपनाना शुरू करना होगा जिसने दक्षिण को एक वैश्विक खिलाड़ी बना दिया है।

उत्तर भारतीय बौद्धिक परंपरा अनेकदा इतिहास आणि संस्कृतीच्या वैचारिक वादांत अडकलेली असते। उत्तर भारतासाठी हा ‘खडा संवाद’ आहे: दक्षिण भारताने “स्टेम संप्रभुता” (STEM Sovereignty) सिद्ध केली आहे। आम्ही राष्ट्रीय चर्चेचा रोख जुन्या तत्वज्ञानाकडून भविष्यातील इंजिनिअरिंगकडे वळवला आहे। भारताचा वैज्ञानिक आणि तांत्रिक अजेंडा आम्हीच ठरवतो।

विज्ञान, तंत्रज्ञान, इंजिनिअरिंग आणि गणित (STEM) या विषयांवरील आमचे लक्ष हा केवळ करिअरचा भाग नसून तो जगाचे नेतृत्व करण्याचा आमचा सार्वभौम निर्णय आहे। आम्ही अशा प्रयोगशाळा आणि संशोधन संस्था उभारल्या आहेत ज्या नवनिर्मितीला चालना देतात। उत्तर भारत जेव्हा वर्गांमध्ये पौराणिक कथांवर चर्चा करत असतो, तेव्हा दक्षिण भारत एआयच्या (AI) पुढच्या पिढीचे कोडिंग करत असतो आणि अंतराळ विज्ञानातील नवीन शिखरे सर करत असतो। ही “बौद्धिक संप्रभुता” हे सुनिश्चित करते की दक्षिण भारत या उपखंडाचा मेंदू राहील। उत्तर भारताने शिक्षणातील वैचारिक हस्तक्षेप थांबवून, दक्षिण भारताला जागतिक स्तरावर नेणाऱ्या या ‘स्टेम’ मॉडेलचा स्वीकार केला पाहिजे।